भारत में नवरात्रि का पर्व हर साल बड़ी धूमधाम और श्रद्धा के साथ मनाया जाता है। यह सिर्फ धार्मिक अनुष्ठान ही नहीं बल्कि भक्ति, साधना और आत्मिक शांति का उत्सव भी है। नौ दिनों तक माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है, और हर दिन का अपना विशेष महत्व होता है। पहले दिन माँ शैलपुत्री, दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी, तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा, चौथे दिन माँ कूष्मांडा और पाँचवे दिन माँ स्कंदमाता की आराधना की जाती है।`

नवरात्रि का पाँचवाँ दिन माँ स्कंदमाता को समर्पित होता है। माँ स्कंदमाता शक्ति, करुणा और मातृत्व का अद्भुत संगम हैं। जो भी भक्त पूरे मन और श्रद्धा से उनकी पूजा करता है, उसे सांसारिक सुखों के साथ-साथ आध्यात्मिक शांति की भी प्राप्ति होती है।
माँ स्कंदमाता का दिव्य स्वरूप

माँ स्कंदमाता का स्वरूप अत्यंत भव्य और शांत है। वे सिंह पर सवार रहती हैं और उनकी गोद में भगवान स्कंद (कार्तिकेय) विराजमान होते हैं।
- इनके चार हाथ हैं – दो हाथों में कमल के पुष्प, एक हाथ में भगवान स्कंद और चौथे हाथ से वे भक्तों को आशीर्वाद देती हैं।
- उनका शरीर गौरवर्ण और आभामंडल से युक्त होता है।
- माँ को पद्मासिनी देवी भी कहा जाता है क्योंकि वे कमल के आसन पर भी विराजमान होती हैं।
उनके चारों ओर कमल के फूलों की आभा फैली रहती है, जो पवित्रता, समृद्धि और आध्यात्मिक ज्ञान का प्रतीक माने जाते हैं। इस रूप में माँ स्कंदमाता अपने भक्तों को यह संदेश देती हैं कि जैसे कमल कीचड़ में खिलकर भी पवित्र और सुंदर रहता है, वैसे ही इंसान को कठिनाइयों के बीच भी अपने जीवन को निर्मल और उज्ज्वल बनाए रखना चाहिए।
माँ स्कंदमाता का स्वरूप बताता है कि माँ न सिर्फ अपने पुत्र की रक्षक हैं बल्कि संपूर्ण सृष्टि की भी पालनहार हैं।
नवरात्रि के पाँचवे दिन का महत्व
नवरात्रि का पाँचवाँ दिन साधकों और भक्तों के लिए विशेष फलदायी माना जाता है।
- यह दिन ज्ञान, विवेक और आत्मबल प्रदान करता है।
- माँ स्कंदमाता की पूजा करने से घर में सुख-शांति बनी रहती है।
- जिनके जीवन में रुकावटें, तनाव या मानसिक अशांति होती है, उन्हें भी राहत मिलती है।
भक्तों को आध्यात्मिक उन्नति और मोक्ष की प्राप्ति का मार्ग मिलता है।
माँ स्कंदमाता की पूजा विधि
- सुबह स्नान कर घर को स्वच्छ करें और पूजा स्थान तैयार करें।
- चौकी पर माँ स्कंदमाता की प्रतिमा या चित्र स्थापित करें।
- पूजा के लिए हरे रंग के वस्त्र धारण करना शुभ माना जाता है।
- माँ को हरे पत्तों, हरे फल (जैसे अमरूद, आंवला) और पुष्प अर्पित करें।
- धूप, दीप, रोली, चावल और नारियल से पूजा करें।
- “ॐ देवी स्कंदमातायै नमः” मंत्र का जाप कम से कम 108 बार करें।
- दुर्गा सप्तशती, देवी कवच और स्कंदमाता की आरती करें।
पूजा करते समय मन को शांत और एकाग्र रखना सबसे आवश्यक है।
पाँचवे दिन का रंग – हरा (Green)

नवरात्रि के पाँचवे दिन का रंग हरा होता है। यह रंग समृद्धि, शांति, संतुलन और नई ऊर्जा का प्रतीक है।
- हरा रंग जीवन में ताजगी और सकारात्मकता लाता है।
- यह रंग करुणा और संतोष की भावना को भी बढ़ाता है।
- भक्त इस दिन हरे वस्त्र पहनकर माँ स्कंदमाता की पूजा करते हैं।
- माना जाता है कि हरा रंग पहनने से जीवन में आत्मविश्वास, सौभाग्य और आध्यात्मिक शक्ति का संचार होता है।
माँ स्कंदमाता की कथा
कथाओं के अनुसार जब देवताओं और असुरों में भयंकर युद्ध हुआ, तब भगवान शिव और माँ पार्वती के पुत्र कार्तिकेय (स्कंद) ने देवताओं का नेतृत्व किया और असुरों का वध किया। उसी समय माँ पार्वती अपने पुत्र के साथ स्कंदमाता के रूप में पूजी गईं।
यह कथा हमें सिखाती है कि माँ अपने भक्तों की हर संकट में रक्षा करती हैं और उन्हें विजय दिलाती हैं।
माँ स्कंदमाता की स्तुति और मंत्र
- मूल मंत्र:
ॐ देवी स्कंदमातायै नमः - स्तोत्र:
या देवी सर्वभूतेषु मातृरूपेण संस्थिता।
नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नमः।।
आरती:
भक्त नवरात्रि के पाँचवे दिन स्कंदमाता की विशेष आरती करके अपनी भक्ति को पूर्णता देते हैं।
माँ स्कंदमाता की आराधना से लाभ
- परिवार में प्रेम और सौहार्द बढ़ता है।
- मानसिक शांति और आत्मबल की प्राप्ति होती है।
- विद्यार्थियों को एकाग्रता और सफलता मिलती है।
- व्यापार और करियर में प्रगति के अवसर बढ़ते हैं।
- जीवन में आने वाली बाधाएँ और शत्रु भी दूर हो जाते हैं।
ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, माँ स्कंदमाता की पूजा करने से बुध ग्रह से जुड़ी बाधाएँ दूर होती हैं।
- यह पूजा बुद्धि और विवेक की वृद्धि करती है।
- विद्यार्थियों को पढ़ाई में सफलता मिलती है।
जिनके व्यापार या नौकरी में बार-बार रुकावट आती है, उनके लिए यह दिन अत्यंत फलदायी है।
भक्तों के अनुभव
कई भक्त मानते हैं कि नवरात्रि के पाँचवे दिन माँ स्कंदमाता की पूजा करने से जीवन में तुरंत सकारात्मक बदलाव आता है।
- किसी को मनचाही नौकरी मिलती है।
- किसी का बिगड़ा स्वास्थ्य सुधरता है।
- किसी का पारिवारिक कलह समाप्त हो जाता है।
ऐसे अनुभव भक्तों की आस्था को और प्रबल करते हैं और समाज में माँ की महिमा का विस्तार करते हैं।
नवरात्रि का पाँचवाँ दिन माँ स्कंदमाता की आराधना का दिन है। यह दिन भक्तों को न केवल सांसारिक सुख देता है बल्कि आध्यात्मिक उन्नति की ओर भी ले जाता है।
हरे रंग के वस्त्र धारण करके और माँ स्कंदमाता की सच्चे मन से पूजा करके जीवन में शांति, सकारात्मकता और समृद्धि का संचार होता है।
जय माता स्कंदमाता! 🙏✨
🙏 जय माता दी!
