
नवरात्रि का पर्व पूरे भारतवर्ष में आस्था, भक्ति और उत्साह के साथ मनाया जाता है। यह सिर्फ धार्मिक त्यौहार ही नहीं, बल्कि जीवन में सकारात्मक ऊर्जा और आध्यात्मिक शांति का प्रतीक भी है। नौ दिनों तक माँ दुर्गा के नौ स्वरूपों की विधिवत पूजा की जाती है। पहले दिन माँ शैलपुत्री, दूसरे दिन माँ ब्रह्मचारिणी और तीसरे दिन माँ चंद्रघंटा की उपासना की जाती है।
यह दिन बहुत खास होता है क्योंकि माँ चंद्रघंटा को साहस और शांति की देवी माना जाता है। जो भक्त पूरे श्रद्धा भाव से उनकी पूजा करते हैं, उन्हें जीवन में कभी भय, असफलता या नकारात्मक ऊर्जा का सामना नहीं करना पड़ता।
माँ चंद्रघंटा कौन हैं?

माँ दुर्गा का तीसरा स्वरूप माँ चंद्रघंटा कहलाता है। इनके माथे पर अर्धचंद्र के आकार की एक स्वर्णिम घंटा शोभा पाती है, इसी कारण इन्हें चंद्रघंटा कहा जाता है। इनके दिव्य स्वरूप को देखकर ही भक्तों के मन में शक्ति और शांति का संचार हो जाता है।
- इनका शरीर स्वर्ण के समान आभामंडल से युक्त है।
- इनकी दस भुजाएँ हैं, जिनमें कमल, गदा, धनुष, बाण, त्रिशूल और अन्य अस्त्र-शस्त्र सुशोभित रहते हैं।
- माँ सिंह पर सवार रहती हैं, जो वीरता और निर्भयता का प्रतीक है।
कहा जाता है कि माँ चंद्रघंटा की घंटा की ध्वनि मात्र से ही राक्षस और नकारात्मक शक्तियाँ भयभीत होकर भाग जाती हैं।
माँ चंद्रघंटा की पूजा का महत्व
माँ चंद्रघंटा की उपासना से भक्तों को अद्भुत शक्ति और आत्मबल मिलता है। यह माना जाता है कि –
- जीवन से डर और भय समाप्त हो जाता है।
- घर-परिवार में सुख, शांति और आपसी प्रेम बढ़ता है।
- दांपत्य जीवन में सामंजस्य और सौहार्द बना रहता है।
- मानसिक तनाव, चिंता और उदासी दूर होकर मन को स्थिरता मिलती है।
- आध्यात्मिक उन्नति के साथ-साथ जीवन के हर क्षेत्र में सफलता प्राप्त होती है।
भक्तों का मानना है कि माँ चंद्रघंटा की आराधना करने से न केवल व्यक्ति की रक्षा होती है, बल्कि उसे नई ऊर्जा और आत्मविश्वास भी मिलता है।
नवरात्रि के तीसरे दिन की पूजा विधि
नवरात्रि का तीसरा दिन पवित्र और शुभ माना जाता है। इस दिन की पूजा विधि में भक्तों को विशेष सावधानी रखनी चाहिए।
- प्रातः स्नान और संकल्प – सुबह जल्दी उठकर स्नान करें और साफ-स्वच्छ वस्त्र धारण करें। फिर माँ चंद्रघंटा की पूजा का संकल्प लें।
- घट (कलश) की पूजा – पहले दिन स्थापित घट की पूजा करें।
- माँ का ध्यान – माँ चंद्रघंटा का ध्यान करें और उनका आवाहन करें।
- श्रृंगार और पूजन सामग्री – माँ को सिंदूर, चुनरी, बिंदी, फूल और आभूषण अर्पित करें।
- भोग अर्पण – माँ को दूध और दूध से बनी मिठाइयाँ जैसे खीर, रसगुल्ला, पनीर की मिठाई आदि अर्पित करें।
- आरती और मंत्र जाप – पूजा के बाद माँ की आरती करें और मंत्र का जाप करें।
माँ चंद्रघंटा का मंत्र
माँ चंद्रघंटा का प्रमुख मंत्र है:
ॐ देवी चंद्रघंटायै नमः।
इस मंत्र का जाप करने से मन को शांति और आत्मविश्वास मिलता है। साथ ही भय और तनाव दूर होते हैं।
माँ चंद्रघंटा की कथा

शास्त्रों में वर्णन मिलता है कि जब राक्षसों ने देवताओं को परेशान करना शुरू किया, तब माँ दुर्गा ने चंद्रघंटा का स्वरूप धारण किया। माँ के इस अद्भुत और वीरतापूर्ण स्वरूप ने राक्षसों का नाश कर देवताओं को भय से मुक्त किया।
इस कथा से यह स्पष्ट होता है कि माँ चंद्रघंटा संकटमोचक हैं। भक्त जब उन्हें सच्चे हृदय से याद करते हैं तो जीवन की हर बाधा और हर भय दूर हो जाता है।
माँ चंद्रघंटा के भक्तों पर कृपा
माँ चंद्रघंटा की कृपा से –
- जीवन में आत्मविश्वास और साहस की वृद्धि होती है।
- घर-परिवार में किसी भी प्रकार का क्लेश या विवाद नहीं होता।
- बच्चों को पढ़ाई और करियर में सफलता मिलती है।
- नौकरी, व्यापार और धन-संपत्ति में उन्नति होती है।
- मानसिक रोग और तनाव कम होता है और मन को स्थिरता मिलती है।
नवरात्रि का तीसरा दिन और ज्योतिषीय महत्व
ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, माँ चंद्रघंटा की पूजा विशेष रूप से उन लोगों के लिए लाभकारी है जिनकी कुंडली में चंद्रमा अशुभ स्थिति में होता है। पूजा और मंत्रजाप से चंद्रमा शांत होता है और मानसिक अशांति दूर होती है।
इस दिन की पूजा से मानसिक स्थिरता, आत्मविश्वास और सौम्यता प्राप्त होती है।
तीसरे दिन का रंग – रॉयल ब्लू
नवरात्रि में हर दिन का एक खास रंग होता है। तीसरे दिन का रंग रॉयल ब्लू (Royal Blue) माना जाता है।
- भक्त इस दिन रॉयल ब्लू रंग के वस्त्र पहनते हैं।
- यह रंग गहराई, शक्ति और आत्मविश्वास का प्रतीक है।
माना जाता है कि इस रंग को धारण करने से मन शांत और विचार स्थिर रहते हैं।
माँ चंद्रघंटा के लिए भोग
इस दिन माँ को दूध और दूध से बनी मिठाइयों का भोग लगाना शुभ माना जाता है।
- खीर
- पनीर की मिठाई
- रसगुल्ला
- मिश्री मिश्रित दूध
ऐसा करने से माँ प्रसन्न होती हैं और भक्तों को उत्तम स्वास्थ्य और दीर्घायु का आशीर्वाद देती हैं।
भक्तों के अनुभव
कई भक्तों का अनुभव है कि माँ चंद्रघंटा की पूजा से उनका जीवन बदल गया।
- किसी को कठिन परीक्षा में सफलता मिली।
- किसी का व्यापार तेजी से बढ़ा।
- किसी का पारिवारिक जीवन सुखमय हुआ।
- कई लोग मानसिक तनाव और अवसाद से बाहर निकले।
यह सब माँ की दिव्य कृपा और आशीर्वाद का ही परिणाम है।
नवरात्रि का तीसरा दिन माँ चंद्रघंटा की पूजा और साधना के लिए अत्यंत शुभ और पवित्र माना जाता है। माँ चंद्रघंटा न केवल भय और संकट दूर करती हैं, बल्कि भक्तों के जीवन में सुख-शांति, समृद्धि और सफलता भी प्रदान करती हैं।
इसलिए हर भक्त को चाहिए कि इस दिन पूरे विधि-विधान से माँ चंद्रघंटा की पूजा करें और उनका स्मरण करते हुए जीवन को सकारात्मक ऊर्जा और आत्मविश्वास से भर दें।
जय माता दी 🙏✨
